जिंदगी

pearl
१—
कोई एक दिन में ही
नहीं मोती बनता –
न किस्मत, चमचमाती है |
पहले बूँद होती है
सीप में पड़ती है
समुद्र में रहती है —
तब कहीं
स्वांति की बूँद
मोती कहलाती है |
gold
२–
यूं नहीं बनता
कभी सोना –
पहले खान से निकालता है
फिर पड़ता है
कई बार
पानी – ऐ – तेजाब से धोना –
ततपश्चात
सुनार की
चोट-पे-चोट
वो सहता है –
तब आग में तपकर
अपने-आप को
वो सोना कहता है !!
jai saf
३–
एक व्यक्ति
खुद रहकर गन्दा
हमें, हमारे पड़ोस को
करता है साफ –
होता नहीं उसके साथ इंसाफ |
उसे हम दुत्कारते हैं
उससे दूर भागते हैं
उसके गन्दा होने में
क्या उसका दोष है ?
या—
हम हैं इसके लिए जिम्मेदार
क्योंकि !
गन्दगी हम ही तो फैलाते हैं ,
घर हो या ट्रेन
साफ करता है वह
करता अपना धंधा —
प्रश्न —
कौन है गन्दा ??
द्वारा–गुलाब चन्द जैसल
नोट : सारे अधिकार कवि के अधीन हैं

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  बदले )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  बदले )

Connecting to %s